रामनाथ शिवेंद्र के आदिवासी एवं दलित केंद्रित कहानी संग्रह
रामनाथ शिवेंद्र के आदिवासी एवं दलित केंद्रित कहानी संग्रह अपनी बात ‘ पनसाल ’ कहानी संग्रह मेरा पहला कहानी संग्रह था जो 1980 में प्रकाशित हुआ था इसके दो साल पहले ‘ सहपुरवा ’ उपन्यास प्रकाशित हो चुका था। संकलन की सभी कहानियॉ देहाती पृष्ठभूमि से उपजी हुई हैं। मुझे याद है वह समय जब छपाई बहुत ही कठिन हुआ करती थी। पहले कम्पोजिंग वह भी एक एक अक्षर चुनना और उसे एक फ्र्रेम में बिठाना फिर छापने के लिए ट्रेडिल मशीन पर सेट करना। तो प्रकाशन का वह मुश्किल दौर था। प्रूफ देखना भी कठिन हुआ करता था भीगे कागज पर कम्पोज्ड सामग्री को हाथ से उतार कर फिर प्रूफ देखा जाता था। ‘ पनसाल ’ संग्रह के लेखकीय वक्तव्य को बिना फेर बदल किए उसी को यहां प्रस्तुत किया जाना आवश्यक जान पड़ रहा है जिससे पता चले सके कि वह दौर कथा साहित्य के लिए कितना मुश्किल था ? ‘ यकीनन ‘ पनसाल ’ कहानी संग्रह छाप कर ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त करने का कुटिल इरादा कम से कम...